शुक्रवार, जुलाई 12, 2013

यही तो संसार है...



जो कल थे वो आज नहीं है,
जो आज है कल जाएंगे,
जग में रौनक कम न होगी,
कल कोई और ही आयेंगे।
आना जाना जीवन मृत्यु,
यही तो संसार है...

स्वार्थ से ही  बंधे हैं,
सब रिशते नाते व परिवार,
मोह माया में लिप्त है केवल,
है खुद पर सब को अहंकार,
वैवनस्य, नफरत और घृणा,
यही तो संसार है...

बेहिसाब करता है धन अर्जित,
जैसे साथ ले जाना है,
शड़यंत्र  लड़ाई जघड़ों में,
बिताता जीवन सारा है,
झल लोभ और महत्वाकाक्षाएं,
यही तो संसार है...

चड़ते सूरज को स्लाम,
पत्थर को मारते हैं ठोकर,
सब कुछ यहां नशवर है,
उदास न होना कुछ भी खोकर,
जहां श्री राम सुखी न रह सके,
यही तो संसार है...



11 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर भाव ,शुभकामनाये,


    यहाँ भी पधारे ,


    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_909.html

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  2. बहुत खुबसूरत एहसास पिरोये है अपने......

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  3. सुन्दर भावों का सटीक प्रगटीकरण-
    बधाई आदरणीय-

    सत्य सर्वथा सत्य है, शब्द शब्द है सत्य |
    चढ़ते सूरज का सदा, जग में है अधिपत्य-

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  4. यही संसार है...
    बातों में सार है!

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर भावों को शब्द दिए हैं !!

    उत्तर देंहटाएं
  6. निसंदेह साधुवाद योग्य लाजवाब अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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  7. प्रिय कुलदीप जी
    सुन्दर भाव रचना के सब नश्वर है इस मर्त्य लोक में कुछ भी साथ जाने वाला नहीं फिर अहं क्यों ....
    हिंदी बनाते समय शब्दों का ध्यान रखें तो आनंद और आये जैसे
    रिश्ते-नाते , बैमनस्य , षड्यंत्र, झगड़ों , छल , चढ़ते
    अभिनंदन आप का भ्रमर का दर्द और दर्पण में पधारने हेतु /ब्लॉग के समर्थन हेतु अपनी राय भी देते रहिये लिखते रहें
    भ्रमर ५

    उत्तर देंहटाएं

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