शुक्रवार, दिसंबर 19, 2014

भाग्यशाली और बदनसीब


भाग्यशाली है वो कुत्ते
जिन  का लालन पालन
बड़ी बड़ी कोठियों में
किसी राजकुमार की तरह हो रहा है
निछावर है जिनपर
शहर की सुंदरियों का सकल प्रेम


उन्ही  कोठियों में
बदनसीब वो बच्चे  भी रहते  हैं
जिन्हे रोटी भी
ताने सुन सुनकर
काम के बदले मिलती है।
 प्रेम पाने की तो
वो अपेक्षा ही नहीं करते।

अगर इन कोठियों में
कुत्तों की जगह
 इन बच्चों का लालन पालन होता
तो मैं कभी भी
इन बच्चों को बदनसीब
उन कुत्तों को भाग्यशाली न कहता।

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (20-12-2014) को "नये साल में मौसम सूफ़ी गाएगा" (चर्चा-1833)) पर भी होगी।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. अगर इन कोठियों में
    कुत्तों की जगह
    इन बच्चों का लालन पालन होता
    तो मैं कभी भी
    इन बच्चों को बदनसीब
    उन कुत्तों को भाग्यशाली न कहता।
    ..यही बात जाने कितने बार मन में आता है ...लेकिन ये बात कुत्ता मालिकों की समझ में आये तो बात बने ...वे भूल जाते हैं कुत्तों को कितना ही इंसानों जैसे रखों लेकिन वे कुत्ते ही रहेगें ...

    उत्तर देंहटाएं

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